सौर मंडल मे सूर्य, आठ मुख्य ग्रहों, कम से कम तीन ‘बौने ग्रह‘ , ग्रहों के 130 से अधिक उपग्रहों, बड़ी संख्या में छोटे पिंड(धूमकेतु और क्षुद्रग्रह), और ग्रहों के बीच के माध्यम का समावेश है। (ध्यान रहे अभी कई और उपग्रह ऐसे है जिन्हे अभी तक खोजा नहीं गया है।)
आंतरिक सौर मंडल मे सूर्य , बुध , शुक्र , पृथ्वी और मंगल ग्रह शामिल हैं :
मुख्य क्षुद्रग्रह पट्टी बृहस्पति और मंगल ग्रह की कक्षाओं के बीच स्थित हैं(चित्र मे नही दिखाया गयी है)। बाह्य सौर ग्रहों मे बृहस्पति , शनि , यूरेनस और नेप्च्यून का समावेश है। (ध्यान दे : प्लूटो अब एक बौना ग्रह (Dwarf Planet)के रूप में वर्गीकृत है।)
सौर मंडल मे अंतरिक्ष ज्यादातर रिक्त(void) है। ग्रहों के बीच की रिक्त जगह की तुलना करने के लिए ग्रह बहुत छोटे हैं। यहां तक कि चित्र पर बिन्दू भी ग्रहों के सही आकारों की तुलना मे काफी बड़े है।
कक्षायें
ग्रहों की कक्षायें दिर्घवृत्त(Ellipse) के आकार की है जिसके एक केन्द्र(Focus) मे रवि है, हालांकि बुध की कक्षा लगभग वृताकार है। सभी ग्रहो की कक्षाये लगभग एक ही प्रतल मे है , जिसे क्रांतिवृत्त कहते है। यह क्रांतिवृत्त पृथ्वी की कक्षा के प्रतल के द्वारा परिभाषित है (दूसरे शब्दों में क्रांतिवृत्त का प्रतल और पृथ्वी की परिक्रमा का प्रतल एक ही है)। यह क्रांतिवृत्त रवि की भूमध्य रेखा के प्रतल से ७ डिग्री उपर है। चित्र सभी आठ ग्रहों की कक्षा सापेक्ष आकार मे दर्शाता है। सभी ग्रह एक ही दिशा (वामावर्त) मे रवि की परिक्रमा करते है। शुक्र, यूरेनस और प्लूटो को छोड़कर सभी ग्रह इसी दिशा मे घूर्णन करते है लेकिन शुक्र, यूरेनस और प्लूटो विपरीत दिशा मे घूर्णन करते है।
ऊपर वाला चित्र अक्टूबर 1996 को सभी ग्रहो की सही स्थिति दर्शाता है।
आकार
ऊपर दिया चित्र सभी आठ ग्रहों और प्लूटो के तुलनात्मक आकार को दर्शाता है।
सौर मंडल के पिण्डो के तुलनात्मक आकार की कल्पना करने के लिये हमे उन्हे १ अरब गुना छोटा कर देखना होगा। इस माडल के अनुसार :
- पृथ्वी का आकार 1.3 सेमी व्यास (अंगूर के दाने के बराबर) का होगा ;
- चंद्रमा पृथ्वी से 30सेमी दूर होगा;
- सूर्य 1.5 मीटर व्यास का(मानव की उंचाई के बराबर) और पृथ्वी से 150 मीटर दूरी पर होगा;
- बृहस्पति 15 सेमी व्यास का(एक बड़े संतरे के आकार का) तथा सूर्य से 750 मीटर दूरी पर होगा;
- शनि एक संतरे के आकार मे सूर्य से 1500 मीटर दूर तथा
- यूरेनस और नेपच्यून नींबु के आकार मे क्रमशः 3 किमी , 4 किमी दूरी पर होंगे।
- मानव एक परमाणु के बराबर होगा।
- निकटतम तारा प्राक्सीमा 4000 किमी पर होगा।
ऊपर के चित्र मे सौर मण्डल के कई पिण्ड नही दिखाए गये है। इनमे शामिल है,
- ग्रहो के उपग्रह;
- क्षुद्रग्रह जो रवि की परिक्रमा कर रहे है (अधिकतर बृहस्पति और मंगल ग्रह की कक्षा के मध्य है);
- धूमकेतु (छोटे बर्फीले पिंड जो सौर मंडल मे आते जाते रहते है और उनकी कक्षा क्रांतिवृत्त से झुकी हुयी होती है) और
- छोटे क्विपर बेल्ट के बर्फिले पिंड जो नेप्च्यून से परे है । कुछ अपवादों को छोड़्कर ग्रहों के उपग्रहों की कक्षा कांतिवृत्त के प्रतल मे ही परिक्रमा करते है लेकिन यह क्षुद्रग्रहों और धूमकेतु के लिए सच नहीं है।
ग्रहो के वर्गीकरण मे कई विवाद है। परंपरागत रूप से, सौर प्रणाली को निम्न वर्गो में विभाजित किया गया है।
- ग्रह( सूर्य की परिक्रमा करने वाले बड़े पिंड),
- उनके उपग्रह (चन्द्र, विभिन्न आकार के ग्रहों की परिक्रमा करते पिंड),)
- क्षुद्रग्रह (छोटे सूर्य की परिक्रमा करते पिंड )और
- धूमकेतु (छोटे बर्फीले पिंड जो अत्यधिक अनिश्चित की कक्षाओं मे सूर्य की परिक्रमा करते है)
सौर मंडल काफी जटिल है:
- यहाँ बुध से बड़े दो चंद्रमा और प्लूटो बड़े कई चन्द्रमा है;
- यहाँ कई छोटे चन्द्रमा ऐसे है जो शायद कभी क्षुद्रग्रहों थे और बाद में ग्रहो ने उन्हे अपने गुरुत्वाकषण से बांध लिया;
- धूमकेतु कभी कभी छोटे हो जाते है और क्षुद्रग्रह जैसे लगते है;
- क्विपर बेल्ट के पिंडो की तरह (प्लूटो और शेरान सहित) इस प्रणाली मे मे अपवाद के जैसे है।
- पृथ्वी / चंद्रमा युग्म और प्लूटो / शेरान युग्म को कुछ वैज्ञानिक युग्म ग्रह मानते है।
ग्रहो का वर्गीकरण रासायनिक संरचना या उत्तपत्ती के स्थान के आधार पर भी किया जा सकता है लेकिन इससे बहुत सारे वर्ग और अपवाद बन जाते है। लब्बोलुआब यह है कि कुछ पिंड अपने आप मे विशेष है और किसी वर्ग मे नही आते है।
आठ मान्य ग्रहों कई तरह से वर्गीकृत किया जा सकता है:
- रचना द्वारा:
- स्थलीय या चट्टानी ग्रह : बुध, शुक्र, पृथ्वी, और मंगल:
- स्थलीय ग्रहों धातु और चट्टानो से बने है। इनका अपेक्षाकृत उच्च घनत्व है, धीमी गति से घूर्णन करते है, इनकी ठोस सतह है, कोई वलय नही है और कम संख्या मे चन्द्रमा है।
- गैस ग्रह: बृहस्पति, शनि, यूरेनस और नेपच्यून:
- आम तौर पर गैस ग्रह मुख्य रूप से हीलियम और हाइड्रोजन के बने हैं और इनका घनत्व कम है, कई उपग्रह है, तेजी से घूर्णन करते है , गहरा वातावरण है, बहुत सारे वलय है।
- स्थलीय या चट्टानी ग्रह : बुध, शुक्र, पृथ्वी, और मंगल:
- आकार से:
- छोटे ग्रह: बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल ग्रह।
- छोटे ग्रहों जिनका कम से कम व्यास 13000 किमी है ।
- विशाल ग्रह: बृहस्पति, शनि यूरेनस और नेपच्यून।
- विशाल ग्रहों व्यास 48000 किमी से अधिक है।
- विशाल ग्रहों को कभी कभी गैस महादानव भी कहते है।
- छोटे ग्रह: बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल ग्रह।
- सूर्य के सापेक्ष द्वारा स्थिति:
- आंतरिक ग्रहों: बुध, शुक्र, पृथ्वी और मंगल ग्रह.
- बाहरी ग्रह: बृहस्पति, शनि, यूरेनस, नेपच्यून.
- मंगल और बृहस्पति के बीच छोटा क्षुद्रग्रह की पट्टी बाह्य ग्रहो और आंतरिक ग्रहो को अलग करती है।
- पृथ्वी के सापेक्ष स्थिति के द्वारा :
- अंदरूनी ग्रह: बुध और शुक्र.
- पृथ्वी से सूर्य के करीब.
- अंदरूनी ग्रह की पृथ्वी से चंद्रमा की तरह कला दिखती है।
- पृथ्वी.
- बाह्य ग्रह: मंगल ग्रह से नेपच्यून ग्रह तक .
- सूर्य से पृथ्वी के आगे.
- बाह्य ग्रहों हमेशा पूरे दिखाई या लगभग पूरे दिखायी देते है।
- अंदरूनी ग्रह: बुध और शुक्र.
- इतिहास द्वारा :
- शास्त्रीय ग्रह: बुध, शुक्र, मंगल, बृहस्पति और शनि
- ऐतिहासीक काल से ज्ञात ग्रह।
- नंगी आँख से दिखायी देते है।
- प्राचीन समय में इसमे सूर्य और चण्द्रमा भी शामिल थे।
- आधुनिक ग्रह: यूरेनस, नेपच्यून.
- आधुनिक काल मे खोज।
- दूरबीन से ही दिखायी देते है।
- पृथ्वी.
- IAU के निर्णय के अनुसार शास्त्रीय ग्रहो मे प्लूटो को छोड़ दिया गया है। इस श्रेणी मे अब बुध से लेकर नेप्च्युन तक आठ ही ग्रह है।
- शास्त्रीय ग्रह: बुध, शुक्र, मंगल, बृहस्पति और शनि


