कैलीस्टो
कैलीस्टो बृहस्पति का आंठवा ज्ञात और दूसरा सबसे बड़ा उपग्रह है। यह गैलेलीयन चन्द्रमाओ मे सबसे बाहर है।
कक्षा : 1,883,000 किमी (बृहस्पति से)
व्यास : 4800 किमी
द्रव्यमान : 1.08e23 किग्रा
ग्रीक कथाओ के अनुसार कैलीस्टो जियस की प्रेमीका देवी थी जिससे हेरा नफरत करती थी। हेरा ने उसे भालू मे बदल दिया था और जियस ने उसे सप्तऋषी तारामण्डल के रूप मे रख दिया था।
इसकी खोज गैलीलीयो ने 1610 मे की थी।
कैलीस्टो बुध ग्रह से थोड़ा ही छोटा है लेकिन इसका द्रव्यमान बुध का एक तिहाई है।
गनीमेड के विपरित कैलीस्टो की कोई अंदरूनी संरचना नही है।
गैलेलीयो यान से प्राप्त जानकारी के अनुसार कैलीस्टो का आंतरिक भाग अब शांत हो रहा है और चट्टाने केन्द्र की ओर बढ रही है। कैलीस्टो मे 40% बर्फ और 60% चटटान/लोहा है। टाईटन और ट्राईटन भी शायद कैलीस्टो के जैसे हैं।
कैलीस्टो की सतह क्रेटरो से पटी है। इसकी सतह पूरानी है जो मंगल और पृथ्वी के चन्द्रमा के जैसी है। कैलीस्टो के सतह पूरे सौर मंडल मे सबसे पूरानी और सबसे ज्यादा क्रेटरो से भरी है जो पिछले 4 अरब वर्षो से ज्यादा नही बदली है।
वहल्ला क्रेटर
बड़े क्रेटर सहकेन्द्री वलयो से घीरे हुये है जो दरारो के जैसे लगते है जो की बर्फ के प्रभाव से चिकने हो गये है। इनमे से सबसे बड़े क्रेटर का नाम वल्हल्ला है जो 3000 किमी व्यास का है।
गनीमीड की तरह कैलीस्टो के प्राचिन क्रेटर बुझ गये है। इनमे भी वलयाकार पर्वत , और केन्द्र मे गहरा गड्डा नही है जो कि चन्द्रमा और बुध के क्रेटरो मे होता है।
गीपूल केटेना
कैलीस्टो मे एक क्रेटरो की श्रखंला है जो एक रेखा मे है जिसे गीपूल केटेना कहते है। यह किसी बड़ी उल्का के टूकड़ो मे कैलीस्टो से टकराने से बनी है। यह घटना शुमेकर लेवी धूमकेतु के बृहस्पति से टकराने के जैसी होगी।
कैलीस्टो का कार्बन डाय आक्साईड का पतला वातावरण है। कैलीस्टो का कमजोर चुंबकिय क्षेत्र है जो सतह के निचे नमकीन द्रव के कारण हो सकता है।
गनीमीड के विपरित कैलीस्टो पर कोई टेक्टानिक गतिविधी नही है। कैलीस्टो बहुत कुछ गनीमीड के जैसा है लेकिन इसका बहुत ही सरल भौगोलिक इतिहास है। इन दोनो के इतिहास मे अंतर विज्ञानियो के लिये चुनौती है।