युरोपा
युरोपा यह बृहस्पति का छठां ज्ञात तथा चौथा बड़ा उपग्रह है, यह गैलीलीयन चन्द्रमाओ मे दूसरा है। युरोपा पृथ्वी के चन्द्रमा से थोड़ा छोटा है।
कक्षा : 670,900किमी (बृहस्पति से)
व्यास : 3138 किमी
द्रव्यमान : 4.80e22 किग्रा
युरोपा एक फोनेन्सीयन राजकुमारी थी जिसका जीयस ने एक सफेद सांड का रूप धारण कर अपहरण कर लिया था। युरोपा जीयस से मीनोस की मां बनी थी।
युरोपा की खोल गैलीलीयो ने 1610 मे की थी।
बाहरी सौर मंडल के अधिकतर चंद्रमाओ के विपरित आयो और युरोपा संरचना मे चट्टानी ग्रहो के जैसे है जो मुख्यतः पिघले सीलीकेट की चट्टानो से बने है। आयो के विपरित युरोपा पर एक बर्फ की बाह्य पतली परत है। गैलीलीयो यान से प्राप्त जानकारी के अनुसार युरोपा की आंतरिक संरचना परतदार है और शायद एक धात्विक केन्द्रक भी है।
युरोपा की आंतरिक संरचना
युरोपा की सतह पूरे आंतरिक सौर मंडल मे सबसे अलग है। यह एकदम चीकनी सतह है,हालांकि कुछ सरंचनाये जो कुछ सौ मीटर उंची है भी पायी गयी है। युरोपा की सतह पर कुछ रैखीक संरचनाये भी है।
युरोपा पर बहुत कम क्रेटर है, 5 किमी व्यास से ज्यादा के सिर्फ 3 क्रेटर ही पाये गये है। इससे यह लगता है कि युरोपा की सतह नयी और सक्रिय है। वायेजर ने युरोपा की सतह के छोटे हिस्से का ही उच्च क्षमता वाली तस्वीरो से मापन किया है, जिससे युरोपा की सतह की उम्र का अनुमान कठिन है।
युरोपा की सतह पृथ्वी पर बर्फ के समुद्र के जैसे है। युरोपा की सतह के बर्फ के निचे द्रव जल की परत की संभावना है जो 50 किमी गहरी हो सकती है। पृथ्वी के बाहर सौर मण्डल मे पानी की अधिकता वाला युरोपा इकलौता पिंड है।
पूरे युरोपा की सतह पर आड़ी खड़ी दरारे है। जिसमे से बड़ी दरारे 20 किमी चौड़ी है। ये दरारे शायद ज्वालामुखी प्रभाव से बनी है।
हब्बल दूरबीन के निरिक्षणो से पता चला है कि युरोपा पर आक्सीजन का बना एक पतला वातावरण है। सौर मंडल के विभिन्न चन्द्रमाओ मे पांच अन्य चन्द्रमाओ आयो, गीनीमेड, कैलीस्टो, टाईटन तथा ट्राईटन पर वातावरण है। पृथ्वी के विपरित युरोपा पर आक्सीजन जैविक नही है। यह मुख्यतः सूर्यप्रकाश के युरोपा की सतह पर बर्फ के कणो से टकरा कर उन्हे आक्सीजन और हायड़ोजन के परमाणुओ मे अलग करने से बनी है।
वायेजर अभियान ने युरोपा पर ज्यादा ध्यान नही दिया था, यह गैलीलीयो यान के निरिक्षण के लिये छोड़ दिया गया था। गैलीलीयो से प्राप्त तस्वीरो ने यह निश्चित कर दिया कि युरोपा की सतह नयी है, क्रेटर कम है और सतह अभी भी सक्रिय है। युरोपा की सतह के बारे मे अभी निश्चित नही है लेकिन यह तय है कि सतह के निचे पानी का समुद्र है।
युरोपा की संरचना के दो संभव माडेल
गैलेलीयो ने पाया है कि युरोपा का एक कमजोर चुंबकिय क्षेत्र है(गनीमीड की चुंबकिय क्षेत्र का 1/4)। यह चुंबकिय क्षेत्र बदलते रहता है विशेषतः बृहस्पति के चुंबकिय क्षेत्र से गुजरने के दौरान ! इस तथ्य के प्रमाण है कि युरोपा की सतह के निचे सुचालक पदार्थ मौजुद है शायद नमकीन पानी का सागर।