मेटीस,आद्रस्टीआ,अमाल्थीआ,थेबे

बृहस्पति के गैलीलीयन चन्द्रमाओ से अंदर की ओर ४ छोटे चन्द्रमा है।

  1. मेटीस
  2. आद्रस्टीआ
  3. अमाल्थीआ
  4. थेबे
मेटीस

मेटीस

मेटीस

यह बृहस्पति का सबसे अंदरूनी ज्ञात उपग्रह है।

कक्षा : 128.000 किमी बृहस्पति से

व्यास : 40 किमी

द्रव्यमान : 9.56e16 किलो

ग्रीक कथाओ मे मेटीस ज़ीउस (बृहस्पति) की पहली पत्नी थी।

इसकी खोज 1979 मे  सीन्नाट(Synnott) वायेजर की तस्वीरो से की थी।

मेटीस और आद्रस्टीआ बृहस्पति के मुख्य वलय के अंदर है, शायद ये वलय के पदार्थ का श्रोत हो सकते है। ग्रह के वलय के छोटे उपग्रहो को मूम भी कहा जाता है।

आद्रस्थीआ

आद्रस्थीआ

आद्रस्टीआ

यह बृहस्पति का दूसरा ज्ञात चन्द्रमा है।

कक्षा : 129,000किमी बृहस्पति से

व्यास : 20किमी(23X20X15)

द्रव्यमान : 1.91e16 कि ग्रा

आद्रस्टीआ पूरष्कार और दंड देने वाली देवी के नाम पर है जो जियस और अनाके के बेटी थी। इसकी खोज एक स्नातक विद्यार्थी डेवीड जेवीट ने 1979मे वायेजर 1 की तस्वीरो से की थी।

मेटीस और आद्रस्टीआ दोनो समकालिक (Synchronus) कक्षा के अंदर तथा रोचे(Roche) सीमा के अंदर है। दोनो इतने छोटे है कि इन पर ज्वारीय खींचाव का असर नही होता है लेकिन इनकी कक्षा छोटी होते जायेगी। आद्रस्टीआ यह सौर मंडल के सबसे छोटे चन्द्रमाओ मे से एक है।

अमाल्थीआ

अमाल्थीआ

अमाल्थीआ

यह बृहस्पति का तिसरा ज्ञात उपग्रह है।

कक्षा : 181,300किमी बृहस्पति से

व्यास : 189किमी

द्रव्यमान: 3.5e18 किग्रा(?)

अमाल्थीआ एक दाई थी जिससे जिअस को बकरी का दूध पीला कर बड़ा किया था।

इसकी खोज बर्नाड ने 9 सितंबर 1892 मे अपनी लीक प्रयोगशाला मे  16 इंच की दूरबीन से किया था। यह सीधे निगाहो से खोजा जानेवाला अंतिम उपग्रह था।

अमाल्थीआ तथा हीमालीया जो बृहस्पति के पांचवे और छटवे सबसे बड़े चन्द्रमा है और लगभग समान आकार के है लेकिन चौथे बड़े चन्द्रमा युरोपा के आकार के 1/15 गुना ही है।

अमाल्थीआ सौर मंडल मे सबसे ज्यादा लाल है जो आयो से उतसर्जित गंधक के कारण है। बृहस्पति के अधिकतर चन्द्रमाओ के जैसे यह भी समकालिक कक्षा मे परिक्रमा करता है। पहले के अनुमानो से ऐसा लगता था कि अपने आकार और अव्यवस्थित आकार के कारण अमाल्थीआ मजबूत ठोस पिंड होगा। लेकिन गैलीलीयो के आंकड़ो के अनुसार इसका घनत्व पानी के घनत्व के बराबर है। यह बर्फ का बना नही है जिससे लगता है कि यह एक फुसफुसा ढेर है।

आयो की तरह यह भी सूर्य से जितनी उर्जा ग्रहण करता है उससे ज्यादा उतसर्जित करता है। यह शायद बृहस्पति के चुंबकिय क्षेत्र के कारण बनने वाली विद्युत धारा से है।

थेबे

थेबे

थेबे

यह बृहस्पति का चौथा ज्ञात उपग्रह है।

कक्षा : 222,000किमी बृहस्पति से

व्यास : 100किमी(100X90)

द्रव्यमान : 7.77e17 किग्रा

थेबे नदीयो के देवता असोपस के बेटी थी।

इसकी खोज 1979 मे  सीन्नाट(Synnott) वायेजर की तस्वीरो से की थी। इसके उपरी सतह पर तीन/चार बड़े क्रेटर है।

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