बृहस्पति
बृहस्पति सूर्य से पांचवा और सबसे बड़ा ग्रह है। यह महाकाय ग्रह बाकी सभी ग्रहो के कुल द्रव्यमान का दूगुना है। बृहस्पति का द्रव्यमान पृथ्वी के द्रव्यमान का ३१८ गुणा है।
कक्षा : 778,330,000 किमी (5.20 AU) सूर्य से
व्यास : 142,948 किमी(विषुवतवृत्त पर)
द्रव्यमान : 1.900e27 किग्रा
बृहस्पति हिन्दू मिथको के अनुसार देवताओ के गुरू है। जूपिटर रोमन मिथको के अनुसार क्रोनस(शनि) के बेटे और देवताओ के राजा, ओलम्पस के सम्राट तथा रोमन साम्राज्य के रक्षक है। ग्रीक मिथको मे वे जीयस है।
बृहस्पति आकाश मे चौथे क्रमांक(सूर्य, चन्द्रमा और शुक्र के बाद) पर सबसे चमकिला पिंड है। इस ग्रह को भी ऐतिहासिक रूप से जाना जाता रहा है। 1610 मे गैलीलीयो ने पहली बार इसे दूरबीन से देखा था और इसके चार सबसे बड़े चन्द्रमा आयो,युरोपा, गनीमीड और कैलीस्टो की खोज की थी। इन चन्द्रमाओ को अब गैलीलीयन चन्द्रमा कहते है। यह पहली खोज थी कि सभी आकाशिय पिंडो की गति का केन्द्र पृथ्वी नही है। यह एक ऐसा मुद्दा था जो कोपरनिकस के सूर्य केन्द्रित सिद्धांत जो समर्थन देता था, साथ मे शुक्र की कलाये का सबूत भी था। गैलीलीयो द्वारा कोपरनिकस के खुले समर्थन ने उन्हे चर्च के विरोध मे खड़ा कर दिया जिसकी सजा उन्हे भूगतनी पड़ी थी। आज कोई भी एक साधारण दूरबीन या बायनाकुलर से गैलीलीयो के निरिक्षण का सत्यापन कर सकता है।
बृहस्पति तक जाने वाला पहला अंतरिक्ष यान पायोनियर 10था जो 1973 मे बृहस्पति तक पहुंचा था, उसके पश्चात पायोनियर 11, वायेजर 1, वायेजर 2, और युलीसीस यान इस ग्रह तक पहुंचे। गैलीलीयो यान 8 वर्षो तक बृहस्पति की कक्षा मे रहा और अब भी यह ग्रह हब्बल दूरबीन के निरिक्षण मे रहता है।
इस गैसीय महाकाय की ठोस सतह नही है, इसका गैसीय द्रव्य का घनत्व गहराई के साथ बढ़ता जाता है। इन गैसीय ग्रहो का व्यास या त्रिज्या उस बिन्दू से मापा जाता है जहां दबाव १ वायुमंडलीय दबाव होता है। जब हम इस ग्रह की तस्वीरे देखते है वह इन ग्रहो के उपर के बादलो की तस्वीरे होती है जो १ वायुमंडलीय दबाव के क्षेत्र से थोड़े उपर होते है।
बृहस्पति ग्रह 90% हायड़्रोजन और 10% हीलीयम से बना है, कुछ मात्रा मे मिथेन, पानी , अमोनिया और चट्टानो का चूरा है। यह प्राथमिक सौर निहारीका के मिश्रण के जैसे ही है जिससे सौर मंडल बना है। शनि की संरचना भी कुछ ऐसे ही है लेकिन नेपच्युन और युरेनस मे हायड़्रोजन और हीलीयम काफी कम है।
बृहस्पति(तथा अन्य गैस ग्रहो) की आंतरिक संरचना के बारे मे हमारी जानकारी अप्रत्यक्ष तरिके से प्राप्त की गयी है। गैलीलीयो यान द्वारा प्राप्त जानकारी गैस के बादलो से १५० किमी निचे तक की ही है।
बृहस्पति की आंतरिक सरंचना (चट्टानी केन्द्रक, द्रव धातु हायड़्रोजन)
बृहस्पति का शायद चट्टानी क्रेन्द्रक(Core) है जो पृथ्वी के द्रव्यमान का 10-15 गुणा हो सकता है। इस क्रेन्द्रक के उपर मुख्य रूप से द्रव धातुयी हायड़्रोजन है। यह द्रव धातुयी हायड़्रोजन 40 लाख बार दबाव पर ही हो सकती है। इतना ज्यादा दबाव बृहस्पति या शनि के केन्द्र मे ही हो सकता है। इस अवस्था मे हायड्रोजन आयोनाइज्ड प्रोटान और इलेक्ट्रान के रूप मे होती है। सूर्य मे भी हायड्रोजन ऐसे ही होती है लेकिन काफी कम तापमान पर। इस तापमान और दबाव पर बृहस्पति के केन्द्र के आसपास हायड्रोजन द्रव अवस्था मे होती है और विद्युत आवेश, चुंबकिय क्षेत्र की वाहक होती है। इस परत मे शायद कुछ हीलीयम और अन्य बर्फ(जल बर्फ नही) भी हो सकती है।
सबसे बाहरी परत मे साधारण आण्विक हायड्रोजन और हीलीयम है; हीलीयम अन्दर द्रव और बाहर गैस के रूप मे होती है। हम जो वातावरण देख पाते है वह इस परत का सबसे बाहरी हिस्सा है। इस हिस्से मे पानी, कार्बन डाय आक्साईड, मिथेन और अन्य आसान अणु भी अत्यल्प मात्रा मे है।
बृहस्पति के वायुमंडल मे बादलो की तीन परते होने का अनुमान है जो अमोनिया की बर्फ, अमोनियम हायड्रोसल्फाईड और बर्फ पानी के मिश्रण की है। गैलीलीयो यान के अनुसार पानी की मात्रा अनुमान से कम है। उम्मीद थी कि बृहस्पति का वातावरण मे सूर्य के जैसे दूगनी मात्रा मे आक्सीजन होगी लेकिन आक्सीजन की मात्रा कम पायी गयी। इसके अलावा आश्चर्यजनक रूप से वातावरण के उपरी भाग का तापमान और घनत्व ज्यादा पाया गया।
बृहस्पति पर वायू के पट्टे और लाल महाकाय धब्बा
बृहस्पति और अन्य गैसीय ग्रहों मे उच्च गति से हवा चलती है जो अक्षांशो के पट्टे मे बहती है। एक दूसरे से सटे पट्टो मे ये हवाये विपरित दिशाओ मे बहती है। विभिन्न पट्टो मे तापमान और रासायनिक सरचना मे अंतर हर पट्टे को एक अलग रंग देती है जो कि इन ग्रहो को एक निश्चीत रंग रूप प्रदान करता है। बृहस्पति के इन पट्टो को कुछ समय से जाना जाता रहा है लेकिन इन पट्टो की सीमा पर स्थित कुछ जटिल चक्रवातो को पहली बार वायेजर से देखा गया। गैलीलीयो यान द्वारा प्राप्त आंकड़ो के अनुसार हवाये उम्मीद से ज्यादा तेज 400मील प्रति घंटा की गति से बहती है। इन हवाओ की गहराई हजारो किलोमीटर तक हो सकती है। बृहस्पति की हवाये सूर्य से प्राप्त उर्जा की बजाये आंतरिक उर्जा से बहती है। पृथ्वी मे हवाये सूर्य से प्राप्त गर्मी के कारण बहती है।
बृहस्पति के बादलो के विभिन्न रंग विभिन्न तत्वो की रासायनिक प्रतिक्रियाओ के कारण है, मुख्यतः गंधक के यौगिको से जो विभिन्न रंगो के होते है।
बृहस्पति का महाकाय लाल धब्बा पृथ्वी से पिछले 300वर्षो से कुतुहुल का विषय रहा है। यह लाल धब्बा एक 12000x 25000किमी का अंडाकार क्षेत्र है जो 2 पृथ्वीयो को समा सकता है। कुछ अन्य छोटे लेकिन ऐसे ही धब्बे दशको से देखे गये है। अवरक्त किरणो के निरिक्षण और घुर्णन की दिशा से पता चलता है ये महाकाय लाल धब्बा एक उच्च दबाव क्षेत्र है जिसके बादल कुछ ज्यादा ही उंचे और आसपास के क्षेत्रो से ठंडे है। ऐसे ही क्षेत्र शनि और नेपच्युन पर भी देखे गये है। यह अभी तक अज्ञात है कि ये उच्च दबाव के क्षेत्र इतने लम्बे समय तक कैसे बने रहते है।
बृहस्पति सूर्य से जितनी उर्जा प्राप्त करता है उससे ज्यादा उर्जा उत्सर्जित करता है। बृहस्पति का आंतरिक भाग गर्म है, केन्द्रक का तापमान शायद 20000 डिग्री केल्वीन है जोकि गुरुत्विय संपिड़ण से उत्पन्न है। बृहस्पति सूर्य के जैसे नाभिकिय संलयन से उर्जा नही बना सकता है क्योंकि गुरुत्विय संपिड़ण से प्राप्त उर्जा नाभिकिय संलयन प्रारंभ करने के लिये पर्याप्त नही है। केन्द्र की यह उर्जा बृहस्पति से बाहर नही निकल पाती है और बादलो के जटिल प्रवाह को नियंत्रित करती है। शनि और नेपच्युन बृहस्पति के जैसे ही है लेकिन युरेनस कुछ अलग है।
बृहस्पति और पृथ्वी (आकार की तुलना)
बृहस्पति अपने व्यास मे उतना ही बड़ा है जितना एक गैस ग्रह हो सकता है। यदि उसमे और द्रव्यमान डाला जाये तब भी वह गुरुत्विय संपिडण से उतना ही बड़ा रहेगा। एक तारा इससे ज्यादा बड़ा अपने आतंरिक (नाभिकिय उर्जा) उर्जा श्रोत से ही इससे बड़ा हो सकता है। लेकिन बृहस्पति को तारा बनने के लिये अपने द्रव्यमान से 80 गुणा ज्यादा द्रव्यमान चाहीये।
बृहस्पति का एक विशाल चुंबकिय क्षेत्र है जोकि पृथ्वी के चुंबकिय क्षेत्र से कहीं ज्यादा शक्तिशाली है। इसका चुंबकिय क्षेत्र 65 करोड़ किमी(शनि की कक्षा से बाहर तक) फैला हुआ है। बृहस्पति के चंद्रमा उसके चुंबकिय क्षेत्र के अंदर ही है। इस चुंबकिय क्षेत्र के कारण बृहस्पति के वातावरण मे कुछ उच्च उर्जायुक्त कण फंसे रह जाते है जो की अंतरिक्ष यानो, अंतरिक्ष यात्रीयो को हानी पहुंचा सकते है। यह पृथ्वी के वान एलन पट्टे के जैसा ही है लेकिन काफी उच्च क्षमता का और मानव के लिये घातक है।
गैलीलीयो यान ने बृहस्पति के वलय और वातावरण के मध्य एक और विकिरण पट्टे का पता लगाया है जो वान एलन पट्टे से 10 गुणा ज्यादा शक्तिशाली है। आश्चर्यजनक रूप से इस पट्टे मे अज्ञात श्रोत वाले उच्च उर्जा वाले हीलीयम आयन है।
बृहस्पति के वलय
बृहस्पति के भी शनि के जैसे वलय है लेकिन ये वलय पतले और छोटे है। वायेजर1 द्वारा इनकी खोज अप्रत्याशित रूप से हुयी थी। शनि के विपरित बृहस्पति के वलय गहरे है(0.05 अल्बिडो). ये शायद चट्टानी धूल के छोटे कणो से बने है। शनि के वलयो के विपरित इन वलयो मे बर्फ नही है।
बृहस्पति आकाश मे एक चमकिले पिंड के जैसे दिखायी देता है।
बृहस्पति के वलय
| वलय | दूरी(000किमी) | चौड़ाई(किमी) | द्रव्यमान(kg) |
| हालो Halo | 100000 | 22800 | ? |
| मुख्य Main | 122800 | 6400 | 1e13 |
| गोसामेर Gossamer | 129200 | 214200 | ? |
बृहस्पति के चन्द्रमा
- बृहस्पति के 63 से ज्यादा चन्द्रमा है जिसमे 4 गैलीलीयन चन्द्रमा है।
- बृहस्पति की घुर्णन गति उसके 4 गैलीलीयन चन्द्रमा द्वारा कम होते जा रही है।आयो युरोपा और गीनीमेड यह 1:2:4 की कक्षिय अनुपात मे है। कैलीस्टो भी लगभग इसमे है। कुछ लाख वर्ष बाद यह चारो ग्रह 1:2:4:8 के कक्षिय अनुपात मे आ जायेंगे।
- बृहस्पति के चन्द्रमाओ का नाम जीयस से जुड़े अन्य पात्रो के नाम पर है।
आयो,युरोपा,गीनीमेड और केलीस्टो
| उपग्रह(चन्द्रमा) | दूरी(000किमी) | त्रिज्या(किमी) | द्रव्यमान(किग्रा) | आविष्कारक | दिनांक |
| मेटीस Metis | 128 | 20 | 9.56e16 | सीन्नाट Synnott | 1979 |
| आड्रेस्टीआAdrastea | 129 | 10 | 1.91e16 | जेवीट Jewitt | 1979 |
| अमाल्थीया Amalthea | 181 | 98 | 7.17e18 | बर्नार्ड Barnard | 1892 |
| थेबे Thebe | 222 | 50 | 7.77e17 | सीन्नाट Synnott | 1979 |
| आयो Io | 422 | 1815 | 8.94e22 | गैलीलीयो Galileo | 1610 |
| युरोपा Europa | 671 | 1569 | 4.80e22 | गैलीलीयो Galileo | 1610 |
| गीनीमेड Ganymede | 1070 | 2631 | 1.48e23 | गैलीलीयो Galileo | 1610 |
| कैलीस्टो Callisto | 1883 | 2400 | 1.08e23 | गैलीलीयो Galileo | 1610 |
| लीडा Leda | 11094 | 8 | 5.68e15 | कोवल Kowal | 1974 |
| हीमालीया Himalia | 11480 | 93 | 9.56e18 | पेरीने Perrine | 1904 |
| लीस्थीया Lysithea | 11720 | 18 | 7.77e16 | Nicholson | 1938 |
| एलारा Elara | 11737 | 38 | 7.77e17 | पेरीने Perrine | 1905 |
| एनाके Ananke | 21200 | 15 | 3.82e16 | निकल्शन Nicholson | 1951 |
| कार्मे Carme | 22600 | 20 | 9.56e16 | निकल्शन Nicholson | 1938 |
| पासीफे Pasiphae | 23500 | 25 | 1.91e17 | मेलोटे Melotte | 1908 |
| सीनोपे Sinope | 23700 | 18 | 7.77e16 | निकल्शन Nicholson | 1914 |