रीआ

रीआ

रीआ

रीआ यह शनि का चौदहवां ज्ञात चन्द्रमा है।

कक्षा : 527,040 किमी शनि से
व्यास : 1530 किमी
द्रव्यमान: 2.49e21 किग्रा

ग्रीक मिथको के अनुसार रीआ क्रोनस(शनि) की बहन और पत्नि थी। वह डेमीटर, हाडेस(प्लूटो), हेरा, हेसटीआ, पासीडान (नेपच्युन) और जीअस की मां थी।

इसकी खोज 1672 मे कासीनी ने की थी।

रीआ से डीओने से बड़ा है लेकिन दोनो समान है। दोनो की संरचना, भूभाग और दृश्टीगत गुण एक जैसे है। दोनो समकालीक घुर्णन करते है और दोनो के सम्मुख गोलार्ध और पृष्ठ गोलार्ध असमान है।

पृष्ठ गोलार्ध मे चमकीली रैखिक संरचनाये है और पृष्ठभाग गहरे रंग का है। इस भाग मे क्रेटर कम है। ये रैखिक संरचनाये क्रेटरो के उपर भी है जो इन्हे नयी संरचना प्रमाणित करती है।

सम्मुख गोलार्ध मे क्रेटरो की भरमार है। कैलीस्टो के क्रेटरो के जैसे यह क्रेटर अब लगभग सपाट है जिसमे वलयाकार पर्वत और मध्य पर्वताकार संरचना नही है। वलयाकार पर्वत और मध्य पर्वताकार संरचना बुध और पृथ्वी के चन्द्रमा के क्रेटरो मे सामान्य है।

पृथ्वी, चन्द्रमा और रीआ(आकार की तुलना मे)

पृथ्वी, चन्द्रमा और रीआ(आकार की तुलना मे)

इन सभी के निष्कर्ष कुछ ऐसे है : निर्माण के तुरंत पश्चात रीआ भूसक्रिय था। किसी प्रक्रिया (हिम ज्वालामुखी) से रीआ की सतह पर रैखीक संरचनाये बन गयी। कुछ समय बाद भूसक्रियता के कम होने के पश्चात उल्काओ के टकराव से क्रेटर बने। यह उल्कापात सम्मुख गोलार्ध पर ज्यादा हुये जिससे रैखिक संरचनाये मिट गयी लेकिन पृष्ठ गोलार्ध पर ये संरचनाये बनी रही।

जैसा कि विज्ञान मे होता है नयी जानकारी और उच्च गुणवत्ता वाले कासीनी यान के चित्रो के अनुसार ये रैखिक संरचनाये बर्फ की ना होकर भूपटल मे आयी दरारे है और क्रेटरो से नयी है।

रीआ मुख्यतः जल बर्फ तथा एक तिहाई भाग सीलीकेट की चट्टानो से बना है।

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