नेपच्युन
नेपच्युन सूर्य का आंठवा और चौथा सबसे बड़ा(व्यास से) ग्रह है। नेपच्युन युरेनस से व्यास के आधार पर छोटा लेकिन द्रव्यमान के आधार पर बड़ा ग्रह है।
कक्षा : 4,504,000,000 किमी(30.06 AU) सूर्य से
व्यास : 49,532 किमी(विषुवत पर)
द्रव्यमान :1.0247e26 किग्रा
रोमन मिथको के अनुसार नेपच्युन सागर का राजा है, इसे ग्रीक मे पासीडान कहा जाता है।
नेपच्युन पहला ग्रह है जिसके होने की भविष्यवाणी गणितिय आधार पर की गयी थी और इसे गणना की गयी जगह पर खोज निकाला गया। युरेनस की खोज के बाद यह पाया गया कि उसकी कक्षा न्युटन के नियमो का पालन नही करती थी। जिससे यह अनुमान लगाया गया कि कोई अन्य ग्रह युरेनस की कक्षा को प्रभावित कर रहा है। एडम्स और ले वेरीएर ने स्वतंत्र रूप से बृहस्पति, शनि और युरेनस की स्थिति के आधार पर नेपच्युन के स्थान की गणना की। गाले और डीअरेस्ट ने 23सितंबर 1846को नेपच्युन की गणना किये गये स्थान के निकट खोज निकाला। इस खोज के श्रेय के लिये एडम्स और ले वेरीयर के मध्य अंतरराष्ट्रिय विवाद उत्पन्न हो गया। जिसे इस खोज का श्रेय दिया जाता उसे इस ग्रह के नामकरण का अधिकार मिलता। अब इन दोनो विज्ञानियो को इस ग्रह की खोज का श्रेय दिया जाता है। बाद के निरिक्षणो से पता चला की एडम्स और ले वेरीयर द्वारा गणना की गयी कक्षा से नेपच्युन विचलित हो जाता है और उनके द्वारा गणना किये गये स्थान पर नेपच्युन का पाया जाना एक संयोग था।
नेपच्युन का आकार(पृथ्वी की तुलना मे)
इसके दो सौ वर्ष पहले 1613मे गैलेलीयो ने नेपच्युन बृहस्पति के समीप देखा था लेकिन उसे एक तारा समझ कर उपेक्षित कर दिया था। लगातार दो रातो को गैलेलीयो ने इसे पास के एक तारे के संदर्भ मे अपने स्थान से विचलित होते देखा था, बाद की रातो मे वह गैलेलियो की दूरबीन से दृश्यपटल से ओझल हो गया था। ध्यान दे कि आकाश मे केवल ग्रह ही गति करते नजर आते है, तारे अपने स्थान पर ही रहते है। यदि गैलेलीयो ने इसके पहले की कुछ रातो को नेपच्युन को देखा होता तब उन्हे इसकी गति नजर आ जाती और नेपच्युन की खोज का श्रेय गैलेलीयो को जाता। लेकिन दुःर्भाग्य से बादलो के छाये रहने से गैलेलीयो उन रातो को आकाश का निरिक्षण नही कर पाया था।
नेपच्युन की यात्रा केवल एक ही अंतरिक्ष यान वायेजर 2 ने की है। नेपच्युन के बारे मे अधिकतर जानकारी इस यान द्वारा दी गयी है लेकिन हब्बल और अन्य वेधशालाओ ने भी इस ग्रह के बारे मे जानकारी जुटायी है।
प्लूटो की कक्षा नेपच्युन की कक्षा को काटती है। इससे कभी कभी वह कुछ वर्षो तक नेपच्युन की कक्षा के अंदर भी रहता है।
१. उपरी वातावरण,२. हायड्रोजन, हीलीयम, मिथेन का वातावरण,३.पानी, मिथेन, अमोनिया से बना भूपटल , ४.बर्फ और चट्टानो से बना केंद्रक
नेपच्युन की संरचना युरेनस के जैसी है। यह मुख्यतः चट्टान और विभिन्न तरह की बर्फ से बना है जिसमे 15% हायड्रोजन और थोड़ी हीलीयम है। यह बृहस्पति और शनि के विपरित है जो मुख्यतः हायड़्रोजन से बने है। युरेनस और नेपच्युन मे बृहस्पति और शनि के विपरित परतदार आंतरिक संरचना नही है और उसमे पदार्थ समान रूप से वितरित है। इनके केन्द्र मे पृथ्वी के आकार का चट्टानी केन्द्रक है।
नेपच्युन के वातावरण मे 83% हायड्रोजन, 15% हीलीयम और 2% मिथेन है।
नेपच्युन का निला रंग उसके वातावरण मे उपरी भाग मे स्थित मिथेन द्वारा लाल रंग के अवशोषण के कारण है लेकिन किसी अन्य अज्ञात तत्व की मौजूदगी से इसके बादलो को गहरा निला रंग मीला है।
अन्य गैस महाकाय ग्रहो की तरह नेपच्युन पर बादलो के पट्टे है जो तेज गति से बहते है। नेपच्युन पर पूरे सौर मंडल मे सबसे तेज गति से 2000किमी/प्रति घंटा तक की गति से हवायें चलती है।
नेपच्युन भी युरेनस और बृहस्पति की तरह सूर्य से प्राप्त उर्जा से ज्यादा उर्जा उत्सर्जित करता है।
बड़ा गहरा धब्बा, द स्कूटर और छोटा गहरा धब्बा
वायेजर 2 ने नेपच्युन के दक्षिणी गोलार्ध पर एक बड़ा गहरा धब्बा देखा था। यह बृहस्पति के महाकाय लाल धब्बे के आकार से आधा था। इस धब्बे मे पश्चिम की ओर की दिशा मे हवा 300 मी/सेकंड की गति से बह रही थी। वायेजर 2 ने दक्षिणी गोलार्ध एक और छोटा धब्बा और एक अनियमित आकार का सफेद बादल देखा था। यह सफेद आकार का धब्बा 16 घंटे मे नेपच्युन की परिक्रमा कर रहा था, इसे ’द स्कूटर’ नाम दिया गया था।
1994 मे हब्बल दूरबीन ने पाया कि यह महाकाय धब्बा अदृश्य हो चूका था। शायद यह तूफान शांत हो गया है या वातावरण की किसी और गतिविधी से दब गया है। कुछ महिनो बाद हब्बल ने उत्तरी गोलार्ध मे एक नया धब्बा देखा। यह प्रदर्शित करता है कि नेपच्युन का वातावरण तेजी से बदलता है, शायद वातावरण के बादलो की उपरी और निचली सतह मे तापमान के परिवर्तन से।
अन्य गैस ग्रहो की तरह नेपच्युन के भी वलय है। बृहस्पति की तरह ये वलय गहरे रंग के है। पृथ्वी से यह वलय टूटे हुये(चाप के जैसे) दिखते है लेकिन वायेजर की तस्विरो मे यह पूरे है। इसमे से एक वलय मुड़े हुये आकार का है। सबसे बाहरी वलय का नाम एडम्स है जिसके तीन मुख्य चाप लिबर्टी, इक्विलिटी तथा फ्रेटर्नीटी है, इसके बाद का वलय अनामित है जो चन्द्रमा गैलेटीआ का समकक्षी है। इसके बाद का वलय लेवेरीएर है जिसके दो सहवलय लासेल और आर्गो है। अंत मे एक धूंधला लेकिन चौड़ा वलय गाले है।
नेपच्युन का चुंबकिय क्षेत्र युरेनस के जैसे विचित्र रूप से निर्देशित है।
नेपच्युन कभी कभी नंगी आंखो से देखा जा सकता है लेकिन बाइनाकुलर या छोटी दूरबीन से इसे आसानी से देखा जा सकता है।
नेपच्युन के चन्द्रमा
नेपच्युन और उसके चन्द्रमा(प्रोटेउस उपर, लारीसा निचे दाएं, डेस्पीना बायें): हब्बल से लिया चित्र
नेपच्युन के १३ ज्ञात चन्द्रमा है।
| उपग्रह | दूरी (000किमी) | व्यास (किमी) | द्रव्यमान(किग्रा) | आविष्कारक | वर्ष |
| नाएड Naiad | 48 | 29 | ? | वायेजर २ | 1989 |
| थैलसा Thalassa | 50 | 40 | ? | वायेजर २ | 1989 |
| डेस्पीना Despina | 53 | 74 | ? | वायेजर २ | 1989 |
| गालेटीआ Galatea | 62 | 79 | ? | वायेजर २ | 1989 |
| लारीसा Larissa | 74 | 96 | ? | वायेजर २ | 1989 |
| प्राटेउस Proteus | 118 | 209 | ? | वायेजर २ | 1989 |
| ट्राईटन Triton | 355 | 1350 | 2.14e22 | लासेल | 1846 |
| नेरीड Nereid | 5509 | 170 | ? | काईपर | 1949 |
| हालीमेडे Halimede | 15728 | 61 | ? | 2002 | |
| साओ Sao | 22422 | 40 | ? | 2002 | |
| लावोमीडीआ Laomedeia | 23571 | 40 | ? | 2002 | |
| सामथे Psamathe | 46695 | 38 | ? | 2003 | |
| नेसो Neso | 48387 | 60 | ? | 2002 |
नेपच्युन के वलय
![]()
| वलय | दूरी (किमी) | चौड़ाई (किमी) | दूसरा नाम |
| डीफ्युज Diffuse | 41900 | 15 | 1989N3R,गाले Galle |
| अंदरूनी Inner | 53200 | 15 | 1989N2R,लेवेरीएर LeVerrier |
| प्लैटेउ Plateau | 53200 | 5800 | 1989N4R,लासेल आर्गो Lassell,Arago |
| मुख्य Main | 62930 | <50 | 1989N1R,एडम्स Adams |