टाईटन

टाईटन - कासीनी द्वारा लीया  चित्र

टाईटन - कासीनी द्वारा लीया चित्र

टाईटन यह चन्द्रमा का पंद्रहवा ज्ञात चन्द्रमा है और सबसे बड़ा है।
कक्षा : 1,221,830 किमी शनि से

व्यास : 5150 किमी

द्रव्यमान : 1.35e23 किग्रा

ग्रीक मिथको के अनुसार टाईटन दैत्यो का परिवार था, वह युरेनस और गैया के पुत्र थे। टाईटनो ने स्वर्ग मे राज्य करने की कोशीश की थी, उन्हे जीयस ने हराया था।

टाईटन की खोज क्रिस्टियन हायजेन्स ने 1655 मे की थी।

पृथ्वी, टाईटन  और चन्द्रमा (आकार की तुलना)

पृथ्वी, टाईटन और चन्द्रमा (आकार की तुलना)

अब तक यह माना जाता था कि टाईटन सौर मंडल मे सबसे बड़ा चन्द्रमा है लेकिन नये निरीक्षण से पता चला है कि टाईटन का वातावरण काफी घना है और उसकी ठोस सतह गनीमेड से छोटी है। टाईटन व्यास मे बुध ग्रह से बड़ा है और प्लूटो से भारी है।

वायेजर 1 अभियान का एक उद्देश्य टाईटन का अध्यन था। वायेजर1 टाईटन की सतह से 4000 किमी तक आया था। हमे टाईटन के  पिछले 300 साल के निरीक्षण से ज्यादा जानकारी वायेजर के उन कुछ मिनटो की उड़ान से मिली है। 2004 के अंत मे कासीनी यान ने टाईटन का अध्यन किया तथा जनवरी 2005 मे हायेजेन्स यान एक निरिक्षक टाईटन की सतह पर उतारा जिसने सतह से कुछ चित्र भेजे।

कासीनी की आंतरिक संरचना

कासीनी की आंतरिक संरचना

टाईटन अपनी संरचना मे गनीमीड, कैलीस्टो, ट्राईटन और संभवतः प्लूटो से मिलता जूलता है; यह आधा जलबर्फ तथा आधा चट्टान से बना है। इसके केन्द्र मे 3400किमी का चट्टानी केन्द्रक और उसके चारो ओर बर्फ की परते है। इसका केन्द्रक अभी भी गर्म हो सकता है। यह संरचना मे रीआ और शनि के अन्य चन्द्र्मा के जैसा है लेकिन अपने अधिक गुरुत्व के कारण घना है।
सौर मंडल के अन्य चंद्रमाओ की तुलना मे केवल टाईटन का सार्थक वातावरण है। इसकी सतह पर दबाव 1.5 बार (पृथ्वी से 50% ज्यादा) है। यह वातावरण मुख्यतः (पृथ्वी के जैसे) नायट्रोजन, 6% ओरगन और कुछ प्रतिशत मिथेन से बना है। एक दर्जन से ज्यादा कार्बनिक पदार्थो की उपस्थिति पायी गयी है जिसमे इथेन, हायड्रोजन सायनाईड, कार्बन डाय आक्साईड मुख्य है। ये कार्बनिक पदार्थ टाईटन के उपरी वातावरण मे मिथेन के सूर्यकिरणो के कारण विघटन से बने है। यह पृथ्वी पर शहरो के उपर बनने वाले कोहरे के जैसा है लेकिन ज्यादा घना होता है। यहां की अवस्था पृथ्वी के इतिहास मे जीवन की शुरुवात की अवस्था के समान है। टाईटन का वातावरण ज्यादा घना होने से उसकी सतह को देखना कठीन होता है।

कासीनी के वातावरण मे कोहरा

कासीनी के वातावरण मे कोहरा

टाईटन पर चुंबकिय क्षेत्र नही है और यह कभी कभी शनि के चुंबकिय क्षेत्र से बाहर चला जाता है। इस वजह से यह कभी कभी सौर वायु के संपर्क मे आ जाता है जिससे वातावरण के बाह्य भाग के कुछ अणु आवेशित होकर बह जाते है। शायद इससे टाईटन की विचित्र रसायनिक प्रक्रिया पर प्रभाव भी पड़ता है।

टाईटन की सतह पर तापमान 94केल्विन रहता है। इस तापमान पर जलबर्फ का बाष्पन नही होता है इस कारण वातावरण मे जलबाष्प नही है।

टाईटन के वातावरण मे कोहरे के अतिरिक्त बादल भी है जो कि मिथेन, इथेन या समान कार्बनिक पदार्थो के हैं। थोड़ी मात्रा मे अन्य जटिल रसायन इस ग्रह के संतरे के रंग का कारण है। हायजेन्स यान से प्राप्त आंकड़ो के विश्लेषण से अधिक जानकारी प्राप्त होने की आशा है।

कासीनी यान से पहले यह माना जाता था कि बादलो से इथेन या मिथेन की बारीश होती होगी और 1000 मीटर गहरे मिथेन के सागर होंगे। अब यह नही माना जाता है। इस तथ्य पर कुछ शंका है कि टाईटन का भूपटल सक्रिय है; यदि इस पर क्रेटर पाये जाते है तो इसका अर्थ यह होगा कि इसका भूपटल नया है। टाईटन पर झीले है जिनमे द्रव की जगह किचड़ भरा है। हायजेन्स से प्राप्त प्राथमिक जानकारी के अनुसार टाईटन की झीले और नदिया सूखी है लेकिन कुछ काल पहले ही वर्षा हुयी है। वर्षा , क्षरण, अपघर्षण और अन्य द्रव प्रक्रियाओ के प्रमाण मीले है।  कासीनी ने मिथेन के ज्वालामुखी के प्रमाण देखे है।

टाईटन की सतह - कासीनी यान से

टाईटन की सतह - कासीनी यान से

सभी श्रोतो से प्राप्त जानकारीयो से अब हम कुछ सीमा तक टाईटन की सतह के बारे मे जानते है। भूआधारित वेधशालाये तथा हब्बल दूरबीन टाईटन की सतह देख सकती है। इनेक अनुसार टाईटन की सतह पर एक महाद्विप और कुछ सागर या झीले देखी जा सकती है। कासीनी यान से लिये गये चित्र भी इन्हे दिखाते है।

टाईटन का घुर्णन शनि के अन्य चन्द्रमाओ की तरह समकालीन है।

कासीनी के अवरक्त कैमरे ने एक रहस्यमय चमकीला धब्बा देखा है।

टाईटन अध्यन के लिये एक जटिल पिंड है। कासीनी यान के उपकरण इसके कोहरे को भेदने के लिये बनाये गये थे, इसके राडार उसकी सतह का मानचित्र बना सकते है तथा हायजेन्स के चित्र इसकी सतह हो साफ दिखाते है। लेकिन अन्य यानो से प्राप्त जानकारी उपयोग के योग्य नही है तथा हायजेन्स ने एक छोटे क्षेत्र के कुछ ही चित्र खिंचे है। आंकड़ो के विश्लेषण मे समय लगेगा तब तक टाईटन एक विचित्र जगह है।

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One Comment to “टाईटन”

  1. टाइटन पर भले ही जीवन अभी जीवन न हो लेकिन कार्बनिक पदार्थों की अधिकता के कारण इसमें जीवन पनप सकता है। भविष्य में मानव वहां रहने लायक कालोनियां बना सकते हैं।

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