Archive for ‘बौने ग्रह’

मार्च 2, 2011

सेरेस : सबसे छोटा बौना ग्रह

सेरेस

सेरेस

सेरेस यह सबसे छोटा बौना ग्रह है। इसे पहले 1-सेरेस के नाम से क्षुद्रग्रह माना जाता था।

कक्षा : 446,000,000 किमी सूर्य से

व्यास : 950 किमी

सेरेस कृषी का रोमन देवता है।

इसकी खोज गुईसेप्पे पिआज्जी ने 1 जनवरी 1801 मे की थी।

सेरेस मंगल और बृहस्पति मे मध्य स्थित मुख्य क्षुद्र ग्रह पट्टे मे है। यह इस पट्टे मे सबसे बड़ा पिंड है। सेरेस का आकार और द्रव्यमान उसे गुरुत्व के प्रभाव मे गोलाकार बनाने के लिये पर्याप्त है। अन्य बड़े क्षुद्रग्रह जैसे 2 पलास, 3 जुनो तथा 10 हायजीआ अनियमित आकार के है।

सेरेस की संरचना

सेरेस की संरचना

सेरेस का एक चट्टानी केन्द्रक है और 100 किमी मोटी बर्फ की परत है। यह 100 किमी मोटी परत सेरेस के द्रव्यमान का 23-28 प्रतिशत तथा आयतन का 50प्रतिशत है। यह पृथ्वी पर के ताजे जल से ज्यादा है। इस के बाहर एक पतली धूल की परत है।

सेरेस की सतह ‘C’ वर्ग के क्षुद्रग्रह के जैसे है। सेरेस पर एक पतले वातावरण के संकेत मीले है।

सेरेस तक कोई अंतरिक्ष यान नही गया है लेकिन नासा का डान इसकी यात्रा 2015मे करेगा।

फ़रवरी 14, 2011

शेरान

शेरान प्लुटो का सबसे बड़ा चन्द्रमा है।
कक्षा : 19,640 किमी प्लुटो से
व्यास : 1206 किमी
द्रव्यमान : 1.52e21 किग्रा
शेरान पाताल मे मृत आत्मा को अचेरान नदी पार कराने वाले नाविक का नाम है।

शेरान

शेरान

शेरान को जीम क्रिस्टी ने 1978 मे खोजा था। पहले यह माना जाता था कि प्लुटो शेरान से काफी बड़ा है क्योंकि प्लुटो और शेरान के चित्र धुंधले थे।

शेरान असामान्य चन्द्रमा है क्योंकि सौर मंडल मे अपने ग्रह की तुलना मे सबसे बड़ा चंद्रमा है। इसके पहले यह श्रेय पृथ्वी और चंद्रमा का था। कुछ वैज्ञानिक प्लुटो/शेरान को ग्रह और चंद्रमा की बजाय युग्म ग्रह मानते है।

शेरान का व्यास अनुमानित है और इसमे 2% की गलती की संभावना है। इसका द्रव्यमान और घनत्व भी ठीक तरह से ज्ञात नही है।

प्लुटो और शेरान एक दूसरे की परिक्रमा समकाल मे करते है अर्थात दोनो एक दूसरे के सम्मुख एक ही पक्ष रखते है। यह सौर मंडल मे अनोखा है।

शेरान की संरचना अज्ञात है लेकिन कम घनत्व( 2 ग्राम/ घन सेमी) दर्शाता है कि यह शनि के बर्फिले चन्द्रमाओ के जैसे है। इसकी सतह पानी की बर्फ से ढंकी है। आश्चर्यजनक रूप से यह प्लुटो से भिन्न है।

यह माना जाता है कि यह प्लुटो की किसी पिंड से टक्कर से बना होगा।

शेरान पर वातावरण होने मे शंका है।

फ़रवरी 14, 2011

प्लुटो

प्लुटो और शेरान(हब्बल दूरबीन से लिया गया चित्र)

प्लुटो और शेरान(हब्बल दूरबीन से लिया गया चित्र)

प्लुटो यह दूसरा सबसे भारी “बौना ग्रह” है। सामान्यतः यह नेपच्युन की कक्षा के बाहर रहता है। प्लुटो सौर मंडल के सात चंद्रमाओ(पृथ्वी का चंद्रमा, आयो, युरोपा,गनीमीड, कैलीस्टो, टाईटन, ट्राईटन) से छोटा है।
कक्षा : 5,913,520,000 किमी (39.5 AU) सूर्य से औसत दूरी

व्यास :2274किमी

द्रव्यमान :1.27e22

रोमन मिथको के अनुसार प्लुटो पाताल का देवता है। इसे यह नाम सूर्य से इसकी दूरी के कारण इस ग्रह पर अंधेरे के कारण तथा इसके आविष्कार पर्सीवल लावेल के आद्याक्षरो (PL) के कारण मीला है।

प्लूटो 1930 मे संयोग से खोजा गया। युरेनस और नेपच्युन की गति के आधार पर की गयी गणना मे गलती के कारण नेपच्युन के परे एक और ग्रह के होने की भविष्यवाणी की गयी थी। लावेल वेधशाला अरिजोना मे क्लायड टामबाग इस गणना की गलती से अनजान थे। उन्होने सारे आकाश का सावधानीपुर्वक निरिक्षण किया और प्लुटो को खोज निकाला।

खोज के तुरंत पश्चात यह पता चल गया थी कि प्लुटो इतना छोटा है कि यह दूसरे ग्रह की कक्षा मे प्रभाव नही डाल सकता है। नेपच्युन के परे X ग्रह की खोज जारी रही लेकिन कुछ नही मीला। और इस ग्रह X के मीलने की संभावना नही है। कोई X ग्रह नही है क्योंकि वायेजर 2 से प्राप्त आंकड़ो के अनुसार युरेनस और नेपच्युन की कक्षा न्युटन के नियमो का पालन करती है। कोई X ग्रह नही है इसका मतलब यह नही है कि प्लुटो के परे कोई और पिंड नही है। प्लुटो के परे बर्फीले क्षुद्रग्रह, धूमकेतु और बड़ी संख्या मे छोटे छोटे पिंड मौजुद है। इनमे से कुछ पिंड प्लुटो के आकार के भी है।

प्लुटो पर अभी तक कोई अंतरिक्ष यान नही भेजा गया है, हब्बल से प्राप्त तस्वीरे भी प्लुटो के बारे मे ज्यादा जानकारी देने मे असमर्थ है। 2006 मे प्रक्षेपित अंतरिक्षयान “न्यु हारीजांस” २०१५ मे प्लुटो के पास पहुंचेगा।

प्लुटो, शेरान, निक्स और हायड्रा

प्लुटो, शेरान, निक्स और हायड्रा

प्लुटो का एक उपग्रह या युग्म ग्रह है, जिसका नाम शेरान है। शेरान को 1978 मे संक्रमण विधी से खोजा गया था, जब प्लुटो सौर मंडल के प्रतल मे आ गया था और शेरान द्वारा प्लुटो के सामने से गुजरने पर इसके प्रकाश मे आयी कमी को देखा जा सकता था।
2005 मे हब्बल ने इसके दो और नन्हे चंद्रमाओ को खोजा जिसे निक्स और हायड्रा नाम दिया गया है। इनका व्यास क्रमशः 50और 60किमी है।

प्लुटो का व्यास अनुमानित है। इसमे 1% की गलती की संभावना है।

प्लुटो और शेरान का द्रव्यमान ज्ञात है जो कि शेरान की कक्षा और परिक्रमा काल का गणना मे प्रयोग कर ज्ञात किया गया है लेकिन प्लुटो और शेरान का स्वतंत्र रूप से द्रव्यमान ज्ञात नही है। इसके लिये दोनो पिंडो द्वारा दोनो के मध्य गुरुत्वकेन्द्र के परिक्रमा काल की गणना करनी होगी। यह गणना हब्बल दूरबीन द्वारा भी नही की जा सकती है। यह गणना ’न्यु हारीजांस’ द्वारा आंकड़े भेजे जाने के बाद ही संभव हो पायेगी।

प्लुटो सौर मंडल मे आयप्टस के बाद सबसे ज्यादा गहरे रंग का पिंड है।

प्लुटो के वर्गीकरण मे विवाद रहा है। यह 75वर्षो तक सौर मंडल मे नवें ग्रह के रूप मे जाना जाता रहा लेकिन 24अगस्त 2006मे इसे अंतराष्ट्रिय खगोल संगठन(IAU) ने ग्रहो के वर्ग से निकाल एक नये वर्ग “बौने ग्रह” मे रख दिया।

प्लुटो की कक्षा अत्याधिक विकेन्द्रित है, यह नेपच्युन की कक्षा के अंदर भी आता रहा है। हाल ही मे यह नेपच्युन की कक्षा के अंदर जनवरी 1979 से 11फरवरी 1999 तक रहा था। प्लुटो अधिकतर ग्रहो की विपरित दिशा मे घुर्णन करता है।

प्लुटो नेपच्युन से3:2 के अनुनाद मे बंधा हुआ है, इसका अर्थ यह है कि प्लुटो का परिक्रमा काल नेपच्युन से 1.5 गुणा लंबा है। इसका परिक्रमा पथ अन्य ग्रहो से ज्यादा झुका हुआ है। प्लुटो नेपच्युन की कक्षा को काटता है ऐसा प्रतित होता है लेकिन परिक्रमा पथ के झुके होने से वह नेपच्युन से कभी नही टकरायेगा।

युरेनस के जैसे प्लुटो का विषुवत उसके परिक्रमा पथ के प्रतल पर लंबवत है।

प्लुटो की सतह पर तापमान -235सेल्सीयस से -210सेल्सीयस तक विचलन करता है। गर्म क्षेत्र साधारण प्रकाश मे गहरे नजर आते है।

प्लुटो की संरचना अज्ञात है लेकिन उसके घनत्व के( 2 ग्राम/घन सेमी) होने से अनुमान है कि यह ट्राईटन के जैसे 70 % चट्टान और 30 % जलबर्फ से बना होगा। इसके चमकदार क्षेत्र नायट्रोजन की बर्फ के साथ कुछ मात्रा मे मिथेन, इथेन और कार्बन मोनाक्साईड की बर्फ से ढंके है। इसके गहरे क्षेत्रो की संरचना अज्ञात है लेकिन इन पर कार्बनिक पदार्थ हो सकते है।

प्लुटो के वातावरण के बारे मे कम जानकारी है लेकिन शायद यह नायट्रोजन के साथ कुछ मात्रा मे मिथेन और कार्बन मोनाक्साईड से बना हो सकता है। यह काफी पतला है और दबाव कुछ मीलीबार है। प्लूटो का वातावरण इसके सूर्य के समिप होने पर ही आस्तित्व मे आता है; शेष अधिकतर काल मे यह बर्फ बन जाता है। जब प्लूटो सूर्य के समिप होता है तब इसका कुछ वातावरण उड़ भी जाता है। नासा के विज्ञानी इस ग्रह की यात्रा इसके वातावरण के जमे रहने के काल मे करना चाहते है।

प्लुटो और ट्राईटन की असामान्य कक्षाये और उनके गुणधर्मो मे समानता इन दोनो मे  ऐतिहासिक संबध दर्शाती है। एक समय यह माना जाता था कि प्लुटो कभी नेपच्युन का चंद्रमा रहा होगा लेकिन अब ऐसा नही माना जाता है। अब यह माना जाता है कि ट्राईटन प्लुटो के जैसे स्वतंत्र रूप से सूर्य की परिक्रमा करते रहा होगा और किसी कारण से नेपच्युन के गुरुत्व की चपेट मे आ गया होगा।। शायद ट्राऊटन, प्लुटो और शेरान शायद उर्ट बादल से सौर मंडल मे आये हुये पिंड है। पृथ्वी के चंद्रमा की तरह शेरान शायद प्लुटो के किसी अन्य पिंड के टकराने से बना है।

प्लुटो को दूरबीन से देखा जा सकता है।

दिसम्बर 16, 2010

सौर मंडल का एक अवलोकन

सौर मंडल मे सूर्य, आठ मुख्य ग्रहों, कम से कम तीन ‘बौने ग्रह‘ , ग्रहों के 130 से अधिक उपग्रहों, बड़ी संख्या में छोटे पिंड(धूमकेतु और क्षुद्रग्रह), और ग्रहों के बीच के माध्यम  का समावेश है। (ध्यान रहे अभी  कई और उपग्रह ऐसे है जिन्हे  अभी तक खोजा नहीं गया है।)

आंतरिक सौर मंडल मे सूर्य , बुध , शुक्र , पृथ्वी और मंगल ग्रह शामिल हैं  :

आंतरिक ग्रह

आंतरिक ग्रह

मुख्य क्षुद्रग्रह पट्टी  बृहस्पति और मंगल ग्रह की कक्षाओं के बीच स्थित हैं(चित्र मे नही दिखाया गयी है)।  बाह्य सौर ग्रहों मे बृहस्पति , शनि , यूरेनस और नेप्च्यून का समावेश है। (ध्यान दे :  प्लूटो  अब एक बौना  ग्रह (Dwarf Planet)के रूप में वर्गीकृत है।)

बाह्य ग्रह

बाह्य ग्रह

सौर मंडल मे अंतरिक्ष ज्यादातर रिक्त(void) है। ग्रहों  के बीच की रिक्त जगह की तुलना करने के लिए ग्रह  बहुत छोटे हैं। यहां तक कि चित्र पर बिन्दू भी ग्रहों के सही आकारों की तुलना मे काफी बड़े है।

कक्षायें

ग्रहों की कक्षायें दिर्घवृत्त(Ellipse) के आकार की है जिसके एक केन्द्र(Focus) मे रवि है, हालांकि बुध की कक्षा लगभग वृताकार है।  सभी ग्रहो की कक्षाये लगभग एक ही प्रतल मे है , जिसे क्रांतिवृत्त कहते है। यह क्रांतिवृत्त पृथ्वी  की कक्षा के प्रतल के द्वारा परिभाषित है (दूसरे शब्दों में क्रांतिवृत्त का प्रतल और पृथ्वी की परिक्रमा का प्रतल एक ही है)। यह क्रांतिवृत्त रवि की भूमध्य रेखा के प्रतल से ७ डिग्री उपर है। चित्र सभी आठ ग्रहों  की कक्षा सापेक्ष आकार मे दर्शाता  है। सभी ग्रह एक ही दिशा (वामावर्त) मे रवि की परिक्रमा करते है। शुक्र, यूरेनस और प्लूटो को छोड़कर सभी ग्रह इसी दिशा मे घूर्णन करते है लेकिन शुक्र, यूरेनस और प्लूटो विपरीत दिशा मे घूर्णन करते है।

ऊपर वाला चित्र अक्टूबर 1996 को सभी ग्रहो की सही स्थिति दर्शाता है।

आकार

तुलनात्मक आकार मे सभी ग्रह (प्लूटो सहित)

तुलनात्मक आकार मे सभी ग्रह (प्लूटो सहित)

ऊपर दिया चित्र  सभी आठ ग्रहों और प्लूटो के तुलनात्मक आकार को दर्शाता है।

सौर मंडल के पिण्डो के तुलनात्मक आकार की कल्पना करने के लिये हमे उन्हे १ अरब गुना छोटा कर देखना होगा।   इस माडल के अनुसार :

  • पृथ्वी का आकार 1.3 सेमी व्यास (अंगूर के दाने के बराबर) का होगा ;
  • चंद्रमा पृथ्वी से 30सेमी दूर होगा;
  • सूर्य 1.5 मीटर व्यास का(मानव की उंचाई के बराबर) और पृथ्वी से 150 मीटर दूरी पर होगा;
  • बृहस्पति 15 सेमी व्यास का(एक बड़े संतरे के आकार का) तथा सूर्य से 750 मीटर दूरी पर होगा;
  • शनि एक संतरे के आकार मे सूर्य से 1500 मीटर दूर तथा
  • यूरेनस और नेपच्यून   नींबु के आकार मे क्रमशः 3 किमी , 4 किमी दूरी पर होंगे।
  • मानव एक परमाणु के बराबर होगा।
  • निकटतम तारा  प्राक्सीमा 4000 किमी पर होगा।

ऊपर के  चित्र मे सौर मण्डल के कई पिण्ड नही दिखाए गये है। इनमे शामिल है,

  • ग्रहो के उपग्रह;
  • क्षुद्रग्रह जो रवि की परिक्रमा कर रहे है (अधिकतर बृहस्पति और मंगल ग्रह की कक्षा के मध्य है);
  • धूमकेतु (छोटे बर्फीले पिंड जो  सौर मंडल मे आते जाते रहते है और उनकी कक्षा  क्रांतिवृत्त से झुकी हुयी होती है) और
  • छोटे क्विपर बेल्ट के बर्फिले पिंड जो नेप्च्यून  से परे है  । कुछ अपवादों को छोड़्कर ग्रहों के उपग्रहों की कक्षा कांतिवृत्त के प्रतल मे ही परिक्रमा करते है लेकिन यह क्षुद्रग्रहों  और धूमकेतु के लिए सच  नहीं है।

ग्रहो के वर्गीकरण मे कई विवाद है। परंपरागत रूप से, सौर प्रणाली को  निम्न वर्गो में विभाजित किया गया है।

  1. ग्रह( सूर्य की परिक्रमा करने वाले बड़े पिंड),
  2. उनके उपग्रह (चन्द्र, विभिन्न आकार के ग्रहों की परिक्रमा करते पिंड),)
  3. क्षुद्रग्रह (छोटे सूर्य की परिक्रमा करते पिंड )और
  4. धूमकेतु (छोटे बर्फीले पिंड जो अत्यधिक अनिश्चित की कक्षाओं मे सूर्य की परिक्रमा करते है)

सौर मंडल काफी जटिल है:

  • यहाँ बुध से बड़े दो चंद्रमा और प्लूटो बड़े कई चन्द्रमा है;
  • यहाँ कई छोटे चन्द्रमा ऐसे है जो  शायद कभी क्षुद्रग्रहों थे और बाद में ग्रहो ने उन्हे अपने गुरुत्वाकषण से बांध लिया;
  • धूमकेतु कभी कभी छोटे हो जाते है और क्षुद्रग्रह जैसे लगते है;
  • क्विपर बेल्ट के पिंडो की तरह  (प्लूटो  और शेरान सहित) इस प्रणाली मे मे अपवाद के जैसे है।
  • पृथ्वी / चंद्रमा युग्म और प्लूटो / शेरान युग्म  को कुछ वैज्ञानिक युग्म ग्रह मानते है।

ग्रहो का वर्गीकरण  रासायनिक संरचना या उत्तपत्ती के स्थान के आधार पर भी किया जा सकता है लेकिन इससे बहुत सारे वर्ग और अपवाद बन जाते है। लब्बोलुआब यह है कि कुछ पिंड अपने आप मे विशेष है और किसी वर्ग मे नही आते है।

आठ मान्य ग्रहों कई तरह से वर्गीकृत किया जा सकता है:

  • रचना द्वारा:
    • स्थलीय या चट्टानी ग्रह : बुध, शुक्र, पृथ्वी, और मंगल:
      • स्थलीय ग्रहों धातु और चट्टानो से बने है।  इनका अपेक्षाकृत उच्च घनत्व है, धीमी गति से घूर्णन करते है,  इनकी ठोस सतह है, कोई वलय नही है और कम संख्या मे चन्द्रमा है।
    • गैस ग्रह: बृहस्पति, शनि, यूरेनस और नेपच्यून:
      • आम तौर पर गैस ग्रह मुख्य रूप से हीलियम और हाइड्रोजन के बने हैं और इनका  घनत्व कम है, कई उपग्रह है, तेजी से घूर्णन करते है , गहरा वातावरण है, बहुत सारे वलय है।
  • आकार से:
    • छोटे ग्रह: बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल ग्रह।
      • छोटे ग्रहों जिनका कम से कम व्यास 13000 किमी है ।
    • विशाल ग्रह: बृहस्पति, शनि यूरेनस और नेपच्यून।
      • विशाल ग्रहों  व्यास 48000 किमी  से अधिक है।
    • विशाल ग्रहों  को कभी कभी गैस महादानव भी कहते है।
  • सूर्य के सापेक्ष द्वारा स्थिति:
    • आंतरिक ग्रहों: बुध, शुक्र, पृथ्वी और मंगल ग्रह.
    • बाहरी ग्रह: बृहस्पति, शनि, यूरेनस, नेपच्यून.
    • मंगल और बृहस्पति के बीच छोटा क्षुद्रग्रह की पट्टी बाह्य ग्रहो और आंतरिक ग्रहो को अलग करती है।
  • पृथ्वी के सापेक्ष स्थिति के द्वारा :
    • अंदरूनी ग्रह: बुध और शुक्र.
      • पृथ्वी से सूर्य के करीब.
      • अंदरूनी ग्रह की पृथ्वी से चंद्रमा की तरह कला दिखती है।
    • पृथ्वी.
    • बाह्य ग्रह:   मंगल ग्रह से नेपच्यून ग्रह तक .
      • सूर्य से पृथ्वी के आगे.
      • बाह्य ग्रहों हमेशा पूरे दिखाई या लगभग पूरे दिखायी देते है।
  • इतिहास द्वारा :
    • शास्त्रीय ग्रह: बुध, शुक्र, मंगल, बृहस्पति और शनि
      • ऐतिहासीक काल से ज्ञात ग्रह।
      • नंगी आँख से दिखायी देते है।
      • प्राचीन समय में इसमे सूर्य और चण्द्रमा भी शामिल थे।
    • आधुनिक ग्रह: यूरेनस, नेपच्यून.
      • आधुनिक काल मे खोज।
      • दूरबीन से ही दिखायी देते है।
    • पृथ्वी.
    • IAU के निर्णय के अनुसार शास्त्रीय ग्रहो मे प्लूटो को छोड़ दिया गया है। इस श्रेणी मे अब बुध से लेकर नेप्च्युन तक आठ ही ग्रह है।