Posts tagged ‘नेपच्युन’

फ़रवरी 9, 2011

नेरेईड

नेरेइड

नेरेइड

यह नेपच्युन का तीसरा सबसे बड़ा चन्द्रमा  है।

कक्षा : 5,513,400 किमी नेपच्युन से
व्यास : 340 किमी
द्रव्यमान : ?

नेरेइड सागरी जलपरी है, और नेरेउस और डोरीस की 50 पुत्रीयो मे से एक है।

इसकी खोज काईपर ने 1949 मे की था।

नेरेइड की कक्षा सौर मंडल के किसी भी ग्रह या चन्द्रमा से ज्यादा विकेन्द्रित है। इसकी नेपच्युन से दूरी 1,353,600 किमी से 9,623,700 किमी तक विचलित होती है। इसकी विचित्र कक्षा से लगता है कि यह एक क्षुद्रग्रह है या काईपर पट्टे का पिंड है।

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फ़रवरी 9, 2011

ट्राईटन

ट्राईटन

ट्राईटन

यह नेपच्युन का सांतवा ज्ञात और सबसे बड़ा चन्द्रमा  है।

कक्षा : 354,760 किमी नेपच्युन से
व्यास : 2700 किमी
द्रव्यमान : 2.14e22 किग्रा

इसकी खोज लासेल ने 1846मे नेपच्युन की खोज के कुछ सप्ताहो मे की थी।

ग्रीक मिथको मे ट्राईटन सागर का देवता है जो नेपच्युन का पुत्र है; इसे मानव के धड़ और चेहरे लेकिन मछली के पुंछ वाले देवता के रूप मे दर्शाया जाता है।

ट्राईटन के बारे मे हमारी जानकारी वायेजर 2 द्वारा 25अगस्त 1989 की यात्रा मे प्राप्त जानकारी तक सीमीत है।

ट्राईटन विपरित दिशा मे नेपच्युन की परिक्रमा करता है। बड़े चंद्रमाओ मे यह अकेला है जो विपरित दिशा मे परिक्रमा करता है। अन्य विपरित दिशा मे परिक्रमा करने वाले बृहस्पति के चन्द्रमा एनान्के, कार्मे, पासीफे तथा सीनोपे और शनि का चन्द्रमा फोबे ट्राईटन के व्यास के 1/10 भाग से भी छोटे है। अपनी इस विचित्र परिक्र्मा के कारण प्रतित होता है कि ट्राईटन शायद सौर मंडल की मातृ सौर निहारिका से नही बना है। यह कहीं और (काईपर पट्टे) मे बना होगा और बाद मे नेपच्युन के गुरुत्व की चपेट मे आ गया होगा। इस प्रक्रिया मे वह नेपच्युन के किसी चन्द्रमा से टकराया होगा। यह प्रक्रिया नेरेईड की आसामान्य कक्षा के पिछे एक कारण हो सकती है।

अपनी विपरित कक्षा के कारण नेपच्युन और ट्राइटन के मध्य ज्वारिय बंध ट्राईटन की गतिज उर्जा कम कर रहा है जिससे इसकी कक्षा छोटी होते जा रही है। भविष्य मे ट्राईटन टूकड़ो मे बंटकर वलय मे बदल जायेगा या नेपच्युन से टकरा जायेगा। इस समय यह एक कल्पना मात्र है।

ट्राईटन का घुर्णन अक्ष भी विचित्र है। वह नेपच्युन के अक्ष के संदर्भ मे 157 डिग्री झुका हुआ है जबकि नेपच्युन का अक्ष 30 डिग्री झुका हुआ है। कुल मिला कर ट्राईटन का घुर्णन अक्ष युरेनस के जैसे है जिसमे इसके ध्रुव और विषुवत के क्षेत्र एक के बाद एक सूर्य की ओर होते है। इस कारण से इसपर विषम मौसमी स्थिती उत्पन्न होती है। वायेजर 2 की यात्रा के समय इसका दक्षिणी ध्रुव सूर्य की ओर था।

ट्राईटन का घनत्व (2.0) शनि के बर्फिले चन्द्रमाओ जैसे रीआ से ज्यादा है। ट्राईटन मे शायद 25% पानी की बर्फ और शेष चट्टानी पदार्थ है।

वायेजर ने ट्राईटन पर वातावरण पाया था जो कि पतला( 0.01 मीलीबार) है और मुख्यतः नाईट्रोजन तथा कुछ मात्रा मे मिथेन से बना है। एक पतला कोहरा 5 से 10किमी उंचाई तक छाया रहता है।

ट्राईटन की सतह पर तापमान 34.5 डीग्री केल्विन (-235 डीग्री सेल्सीयस) रहता है जो कि प्लूटो के जैसे है। इसकी चमक ज्यादा है(0.7-0.8) जिससे सूर्य की अत्यल्प रोशनी की भी छोटी मात्रा अवशोषित होती है। इस तापमान पर मिथेन, नाईट्रोजन और कार्बन डाय आक्साईड जमकर ठोस बन जाती है।इस पर कुछ ही क्रेटर दिखायी देते है;इसकी सतह नयी है। इसके दक्षिणी गोलार्ध मे नायट्रोजन और मिथेन की बर्फ जमी रहती है।ट्राईटन की सतह पर जटिल पैटर्न मे पर्वत श्रेणी और घाटीयां है जो कि शायद पिघलने/जमने के प्रक्रिया के कारण है।

ट्राईटन की सतह पर इसके ज्वालामुखी द्वारा उत्सर्जित नायट्रोजन के प्रवाह से बनी धारियां

ट्राईटन की सतह पर इसके ज्वालामुखी द्वारा उत्सर्जित नायट्रोजन के प्रवाह से बनी धारियां

ट्राईटन की दूनिया मे सबसे विचित्र इसके बर्फिले ज्वालामुखी है। इनसे निकलनेवाला पदार्थ द्रव नाईट्रोजन, धूल और मिथेन के यौगिक है। वायेजर के एक चित्र मे एक ज्वालामुखी(हिममुखी) सतह से 8 किमी उंचा और 140 किमी चौड़ा है।

ट्राईटन, आयो, शुक्र और पृथ्वी सौर मंडल मे सक्रिय ज्वालामुखी वाले पिंड है। मंगल पर भूतकाल मे ज्वालामुखी थे। यह भी एक विचित्र तथ्य है कि पृथ्वी और शुक्र (मंगल भी )के ज्वालामुखी चट्टानी पदार्थ उत्सर्जित करते है और अंदरूनी गर्मी द्वारा चालित है, जबकि आयो के ज्वालामुखी गंधक या गंधक के यौगिक उत्सर्जित करते है और बृहस्पति के ज्वारिय बंध द्वारा चालित है, वहीं ट्राईटन के ज्वालामुखी नाईट्रोजन या मिथेन उत्सर्जित करते है तथा सूर्य द्वारा प्रदान मौसमी उष्णता से चालित है।

फ़रवरी 9, 2011

प्राटेउस

प्राटेउस

प्राटेउस

यह नेपच्युन का छठां ज्ञात और दूसरा सबसे बड़ा चन्द्रमा  है।

कक्षा : 117,600 किमी नेपच्युन से
व्यास : 418 किमी(436x416x402)
द्रव्यमान : ?

प्राटेउस एक सागरी देवता था जो अपना आकार बदल सकता था।

इसकी खोज 1989 मे वायेजर 2 ने की थी। यह नेरेइड से बड़ा है लेकिन बहुत गहरे रंग का है। यह नेपच्युन के इतने समीप है कि इसे नेपच्युन की चमक मे देखा जाना कठिन है।

प्राटेउस अनियमित आकार का चन्द्रमा है। यह शायद अनियमित आकार के पिंड के लिये गुरुत्व के कारण गोलाकार होने की सीमा से थोड़ा ही छोटा है।

इसकी सतह पर क्रेटरो की भरमार है और भूगर्भिय गतिविधी के कोई प्रमाण नही है।

फ़रवरी 9, 2011

लारीस्सा

लारीस्सा

लारीस्सा

यह नेपच्युन का पांचवा ज्ञात चन्द्रमा है।
कक्षा : 73,600 किमी नेपच्युन से
व्यास : 193 किमी(208 x 178)
द्रव्यमान : ?

लारीस्सा पेलासगस की पुत्री का नाम है।

इसकी खोज 1989 मे वायेजर 2 ने की थी। इसकी खोज का श्रेय हेराल्ड रेइट्सेमा को दिया जाता है।

प्राटेउस की तरह लारीस्सा भी अनियमित आकार का चन्द्रमा है।

फ़रवरी 9, 2011

नाइड,थैलसा,डेस्पीना,गैलटीआ

नेपच्युन के अंदरूनी चार चंद्रमा है:

  1.  नाइड
  2. थैलसा
  3. डेस्पीना
  4. गैलटीआ

नाइड

नाइड या थैलसा

नाइड या थैलसा

यह नेपच्युन का सबसे अंदरूनी ज्ञात चन्द्रमा है।

कक्षा : 48,200 किमी नेपच्युन से
व्यास : 58 किमी
द्रव्यमान : ?

इसकी खोज 1989 मे वायेजर 2 ने की थी।

नाईड नदियो, फव्वारो और झरनो की परीयां है।
नाईड, थैलसा, डेस्पीना और गैलेटीआ सभी अनियमित आकार के चन्द्रमा है।

थैलसा

यह नेपच्युन का दूसरा ज्ञात चन्द्रमा है।

कक्षा : 50,000 किमी नेपच्युन से
व्यास : 80 किमी
द्रव्यमान : ?
थैलसा ऐथर और हेमेरा की पुत्री है। थैलसा ग्रीक मे सागर को कहते है। इसकी खोज 1989 मे वायेजर 2 ने की थी।

डेस्पीना

डेस्पीना

डेस्पीना

यह नेपच्युन का तीसरा ज्ञात चन्द्रमा है।

कक्षा : 52,600 किमी नेपच्युन से
व्यास : 148 किमी
द्रव्यमान : ?
डेस्पीना नेपच्युन और डेमीटर की पुत्री का नाम है।
इसकी खोज 1989 मे वायेजर 2 ने की थी।

गैलटीआ

गैलीटीआ

गैलीटीआ

यह नेपच्युन का तीसरा ज्ञात चन्द्रमा है।
कक्षा : 62,000किमी नेपच्युन से
व्यास : 158 किमी
द्रव्यमान : ?
गैलेटीआ एक सीसलीयन नेरीड थी जो सायक्लोप्स पालीफेमुस की प्रेमीका थी।

इसकी खोज 1989 मे वायेजर 2 ने की थी।

फ़रवरी 9, 2011

नेपच्युन

नेपच्युन

नेपच्युन

नेपच्युन सूर्य का आंठवा और चौथा सबसे बड़ा(व्यास से) ग्रह है। नेपच्युन युरेनस से व्यास के आधार पर छोटा लेकिन द्रव्यमान के आधार पर बड़ा ग्रह है।
कक्षा : 4,504,000,000 किमी(30.06 AU) सूर्य से
व्यास : 49,532 किमी(विषुवत पर)
द्रव्यमान :1.0247e26 किग्रा

रोमन मिथको के अनुसार नेपच्युन सागर का राजा है, इसे ग्रीक मे पासीडान कहा जाता है।

नेपच्युन पहला ग्रह है जिसके होने की भविष्यवाणी गणितिय आधार पर की गयी थी और इसे गणना की गयी जगह पर खोज निकाला गया। युरेनस की खोज के बाद यह पाया गया कि उसकी कक्षा न्युटन के नियमो का पालन नही करती थी। जिससे यह अनुमान लगाया गया कि कोई अन्य ग्रह युरेनस की कक्षा को प्रभावित कर रहा है। एडम्स और ले वेरीएर ने स्वतंत्र रूप से बृहस्पति, शनि और युरेनस की स्थिति के आधार पर नेपच्युन के स्थान की गणना की। गाले और डीअरेस्ट ने 23सितंबर 1846को नेपच्युन की गणना किये गये स्थान के निकट खोज निकाला। इस खोज के श्रेय के लिये एडम्स और ले वेरीयर के मध्य अंतरराष्ट्रिय विवाद उत्पन्न हो गया। जिसे इस खोज का श्रेय दिया जाता उसे इस ग्रह के नामकरण का अधिकार मिलता। अब इन दोनो विज्ञानियो को इस ग्रह की खोज का श्रेय दिया जाता है। बाद के निरिक्षणो से पता चला की एडम्स और ले वेरीयर द्वारा गणना की गयी कक्षा से नेपच्युन विचलित हो जाता है और उनके द्वारा गणना किये गये स्थान पर नेपच्युन का पाया जाना एक संयोग था।

नेपच्युन का आकार(पृथ्वी की तुलना मे)

नेपच्युन का आकार(पृथ्वी की तुलना मे)

इसके दो सौ वर्ष पहले 1613मे गैलेलीयो ने नेपच्युन बृहस्पति के समीप देखा था लेकिन उसे एक तारा समझ कर उपेक्षित कर दिया था। लगातार दो रातो को गैलेलीयो ने इसे पास के एक तारे के संदर्भ मे अपने स्थान से विचलित होते देखा था, बाद की रातो मे वह गैलेलियो की दूरबीन से दृश्यपटल से ओझल हो गया था। ध्यान दे कि आकाश मे केवल ग्रह ही गति करते नजर आते है, तारे अपने स्थान पर ही रहते है। यदि गैलेलीयो ने इसके पहले की कुछ रातो को नेपच्युन को देखा होता तब उन्हे इसकी गति नजर आ जाती और नेपच्युन की खोज का श्रेय गैलेलीयो को जाता। लेकिन दुःर्भाग्य से बादलो के छाये रहने से गैलेलीयो उन रातो को आकाश का निरिक्षण नही कर पाया था।

नेपच्युन की यात्रा केवल एक ही अंतरिक्ष यान वायेजर 2 ने की है। नेपच्युन के बारे मे अधिकतर जानकारी इस यान द्वारा दी गयी है लेकिन हब्बल और अन्य वेधशालाओ ने भी इस ग्रह के बारे मे जानकारी जुटायी है।

प्लूटो की कक्षा नेपच्युन की कक्षा को काटती है। इससे कभी कभी वह कुछ वर्षो तक नेपच्युन की कक्षा के अंदर भी रहता है।

१. उपरी वातावरण,२. हायड्रोजन, हीलीयम, मिथेन का वातावरण,३.पानी, मिथेन, अमोनिया से बना भूपटल , ४.बर्फ और चट्टानो से बना केंद्रक

१. उपरी वातावरण,२. हायड्रोजन, हीलीयम, मिथेन का वातावरण,३.पानी, मिथेन, अमोनिया से बना भूपटल , ४.बर्फ और चट्टानो से बना केंद्रक

नेपच्युन की संरचना युरेनस के जैसी है। यह मुख्यतः चट्टान और विभिन्न तरह की बर्फ से बना है जिसमे 15% हायड्रोजन और थोड़ी हीलीयम है। यह बृहस्पति और शनि के विपरित है जो मुख्यतः हायड़्रोजन से बने है। युरेनस और नेपच्युन मे बृहस्पति और शनि के विपरित परतदार आंतरिक संरचना नही है और उसमे पदार्थ समान रूप से वितरित है। इनके केन्द्र मे पृथ्वी के आकार का चट्टानी केन्द्रक है।

नेपच्युन के वातावरण मे 83% हायड्रोजन, 15% हीलीयम और 2% मिथेन है।

नेपच्युन का निला रंग उसके वातावरण मे उपरी भाग मे स्थित मिथेन द्वारा लाल रंग के अवशोषण के कारण है लेकिन किसी अन्य अज्ञात तत्व की मौजूदगी से इसके बादलो को गहरा निला रंग मीला है।

अन्य गैस महाकाय ग्रहो की तरह नेपच्युन पर बादलो के पट्टे है जो तेज गति से बहते है। नेपच्युन  पर पूरे सौर मंडल मे सबसे तेज गति से 2000किमी/प्रति घंटा तक की गति से हवायें चलती है।

नेपच्युन भी युरेनस और बृहस्पति की तरह सूर्य से प्राप्त उर्जा से ज्यादा उर्जा उत्सर्जित करता है।

बड़ा गहरा धब्बा, द स्कूटर और छोटा गहरा धब्बा

बड़ा गहरा धब्बा, द स्कूटर और छोटा गहरा धब्बा

वायेजर 2 ने नेपच्युन के दक्षिणी गोलार्ध पर  एक बड़ा गहरा धब्बा देखा था। यह बृहस्पति के महाकाय लाल धब्बे के आकार से आधा था। इस धब्बे मे पश्चिम की ओर की दिशा मे हवा 300 मी/सेकंड की गति से बह रही थी। वायेजर 2 ने दक्षिणी गोलार्ध एक और छोटा धब्बा और एक अनियमित आकार का सफेद बादल देखा था। यह सफेद आकार का धब्बा 16 घंटे मे नेपच्युन की परिक्रमा कर रहा था, इसे ’द स्कूटर’ नाम दिया गया था।

1994 मे हब्बल दूरबीन ने पाया कि यह महाकाय धब्बा अदृश्य हो चूका था। शायद यह तूफान शांत हो गया है या वातावरण की किसी और गतिविधी से दब गया है। कुछ महिनो बाद हब्बल ने उत्तरी गोलार्ध मे एक नया धब्बा देखा। यह प्रदर्शित करता है कि नेपच्युन का वातावरण तेजी से बदलता है, शायद वातावरण के बादलो की उपरी और निचली सतह मे तापमान के परिवर्तन से।

अन्य गैस ग्रहो की तरह नेपच्युन के भी वलय है। बृहस्पति की तरह ये वलय गहरे रंग के है। पृथ्वी से यह वलय टूटे हुये(चाप के जैसे) दिखते है लेकिन वायेजर की तस्विरो मे यह पूरे है। इसमे से एक वलय मुड़े हुये आकार का है। सबसे बाहरी वलय का नाम एडम्स है जिसके तीन मुख्य चाप लिबर्टी, इक्विलिटी तथा फ्रेटर्नीटी है, इसके बाद का वलय अनामित है जो चन्द्रमा गैलेटीआ का समकक्षी है। इसके बाद का वलय लेवेरीएर है जिसके दो सहवलय लासेल और आर्गो है। अंत मे एक धूंधला लेकिन चौड़ा वलय गाले है।

नेपच्युन का चुंबकिय क्षेत्र युरेनस के जैसे विचित्र रूप से निर्देशित है।

नेपच्युन कभी कभी नंगी आंखो से देखा जा सकता है लेकिन बाइनाकुलर या छोटी दूरबीन से इसे आसानी से देखा जा सकता है।

नेपच्युन के चन्द्रमा

नेपच्युन और उसके चन्द्रमा(प्रोटेउस उपर, लारीसा निचे दाएं, डेस्पीना बायें): हब्बल से लिया चित्र

नेपच्युन और उसके चन्द्रमा(प्रोटेउस उपर, लारीसा निचे दाएं, डेस्पीना बायें): हब्बल से लिया चित्र

नेपच्युन के १३ ज्ञात चन्द्रमा है।

उपग्रह दूरी (000किमी) व्यास (किमी) द्रव्यमान(किग्रा) आविष्कारक वर्ष
नाएड Naiad 48 29 ? वायेजर २ 1989
थैलसा Thalassa 50 40 ? वायेजर २ 1989
डेस्पीना Despina 53 74 ? वायेजर २ 1989
गालेटीआ Galatea 62 79 ? वायेजर २ 1989
लारीसा Larissa 74 96 ? वायेजर २ 1989
प्राटेउस Proteus 118 209 ? वायेजर २ 1989
ट्राईटन Triton 355 1350 2.14e22 लासेल 1846
नेरीड Nereid 5509 170 ? काईपर 1949
हालीमेडे Halimede 15728 61 ? 2002
साओ Sao 22422 40 ? 2002
लावोमीडीआ Laomedeia 23571 40 ? 2002
सामथे Psamathe 46695 38 ? 2003
नेसो Neso 48387 60 ? 2002

नेपच्युन के वलय

नेपच्युन के वलय(वायेजर २ से लिया चित्र)

वलय दूरी (किमी) चौड़ाई (किमी) दूसरा नाम
डीफ्युज Diffuse 41900 15 1989N3R,गाले Galle
अंदरूनी Inner 53200 15 1989N2R,लेवेरीएर LeVerrier
प्लैटेउ Plateau 53200 5800 1989N4R,लासेल आर्गो Lassell,Arago
मुख्य Main 62930 <50 1989N1R,एडम्स Adams